पापी पेट का सवाल हैः रोटी के लिये जिन्दगी को दांव पर लगा रहे ‘कलाकार’ बिना सिक्योरिटी के कार्यक्रमों में करते हैं आग के स्टंट, कई कलाकार हो चुके हादसों का शिकार
मुजफ्फरनगर। पेट की आग बुझाने की खातिर आग से खेलने को मजबूर स्टंटमेन कपनी कला का मंचन करते हुए कई बार हादसों का शिकार हो चुके हैं, इनमें से कई कलाकारों ने अपनी जान तक गंवा दी है। कलाकारों के साथ होने वाले हादसों को पुलिस व प्रशासन द्वारा नजर अंदाज किया जा रहा है और वह इन कलाकारों की जान की परवाह न करते हुए मानकों को नजरअंदाज कर कार्यक्रमों की अनुमति जारी कर रहे हैं, जिसका खामियाजा कलाकारों को भुगतना पड़ रहा है। 

गौरतलब है कि धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अलावा निजी कार्यक्रमों में कलाकारों द्वारा जानलेवा स्टंट कराये जाने का प्रचलन आम हो गया है। इन स्टंट में कलाकारों द्वारा मुंह से आग निकालना हो या फिर अन्य जानलेवा स्टंट। कलाकारों द्वारा किये जाने वाले स्टंटों का लोग जमकर मजा लूटते हैं, और जब कलाकार आयोजकों की चूक के चलते हादसों का शिकार हो जाते हैं, तो लोग केवल संवेदना ही व्यक्त कर पाते हैं।  धार्मिक, राजनीतिक व सांकृतिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए पहले पुलिस व प्रशासन से अनुमति ली जाती है और इनके द्वारा अनुमति दिये जाने के बाद ही कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यदि ऐसे में कलाकारों को सुरक्षा नहीं मिल पाती, तो कहीं न कहीं इसमें पुलिस व प्रशासन की चूक मानी जाती है। रामपुरी में हो रहे रामलीला मंचन में जिस तरह से ताड़का का मंचन कर रहे कलाकार आग लगने से बुरी तहर झुलसा है और जिन्दगी और मौत से जूझ रहा है, उसमें पूरी तरह आयोजकों के साथ-साथ पुलिस व प्रशासन की भी चूक नजर आ रही है। आयोजकों द्वारा जिस समय कार्यक्रम की अनुमति ली गई थी, यदि उस समय पुलिस व प्रशासन द्वारा सभी मानकों को पूरा करा लिया होता, तो शायद आज कलाकार अंकित की जो हालत है, वह न होती। सोशल मीडिया पर जारी हुई अंकित के आग लगने की वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि जिस समय अंकित को आग लगी, उस समय मंच पर न तो आग बुझाने वाला कोई यंत्र मौजूद था और न ही वहां पर पानी व आग बुझाने के लिये रेत की ही व्यवस्था थी। रामलीला में मौजूद लोगों द्वारा मंच पर डाले गये कपड़ों से आग बुझाने का प्रयास किया गया, परन्तु कपड़ा भी सिन्थेटिक होने के कारण आग बुझाने में नाकाम साबित होता नजर आया।  यदि मंच पर आग बुझाने वाला यंत्र मौजूद होता, तो शायद अंकित जिन्दगी और मौत से न जूझ रहा होता। 

 

पूर्व की घटनाओं से भी प्रशासन ने नहीं लिया सबक

मुजफ्फरनगर। रामलीला में मंचन के द्वारा आग लगने की घटना अंकित के साथ ही नहीं हुई है, बल्कि पूर्व में भी जनपद में ऐसी घटनाएं घटित हो चुकी हैं, परन्तु लापरवाह प्रशासन द्वारा पूर्व की घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया गया और बिना मानकों के एनओसी जारी कर दी। बता दें कि चार वर्ष पूर्व कांवड़ यात्रा के दौरान एक कांवडिया द्वारा वो ही स्टंट किया जा रहा था, जो अंकित द्वारा रामलीला में किया गया। इस स्टंट के चलते कांवड़िया बुरी तरह झुलस गया था और उसे गंभीर हालत में हायर सेंटर के लिये रेफर करना पड़ा था। ऐसा ही एक मामला दो वर्ष पूर्व दशहरे के दिन हुआ था। दो वर्ष पूर्व दशहरे के दिन नुमाईश कैम्प से शोभायात्रा निकाली जा रही थी। शोभायात्रा में एक कलाकार द्वारा आग का स्टंट किया जा रहा था। इस स्टंट में कलाकार को आग लग गई थी और वह बुरी तरह झुलस गया था। आग बुझाने का कोई साधन न होने के चलते कलाकार को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस तरह की घटनाएं घटित होने के बाद भी पुलिस व प्रशासन द्वारा बिना शर्त के इस तरह के कार्यक्रमों की अनुमति दे दी गई और इसका नतीजा यह हुआ कि अंकित आज जिन्दगी और मौत से लड़ रहा है। 

 

हादसे के बाद नींद से जागी पुलिस

मुजफ्फरनगर। बीती देर रात रामलीला मंचन के दौरान हुई आग से कलाकार के जलने की घटना के बाद नींद से जागी पुलिस ने जनपद भर के रामलीला आयोजकों को अग्निशमन यंत्र रखने की चेतावनी दी है। एसएसपी अभिषेक यादव के निर्देश पर आज पुलिस व अग्निशमन विभाग ने रामलीला पंडालो की चैकिंग का अभियान चलाया गया।